गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत, ‘स्वाभिमान’ ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की मिसाल…

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देहरादून, 14 मई 2026। राजधानी देहरादून के विकासखंड विकासनगर की ग्राम सोरना डोभरी निवासी कल्पना बिष्ट आज प्रदेशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। राज्य सरकार की योजनाओं और ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से स्थापित उनकी “स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट” ग्रामीण महिला उद्यमिता का सफल मॉडल बन चुकी है। यह यूनिट न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि पारंपरिक मिलेट्स उत्पादों को आधुनिक बाजार में नई पहचान दिला रही है।

कल्पना बिष्ट ने वर्ष 2024-25 में करीब 10 लाख रुपये की लागत से इस बेकरी यूनिट की शुरुआत की। इसमें रीप परियोजना से 6 लाख रुपये की सहायता, 3 लाख रुपये का बैंक ऋण और 1 लाख रुपये का स्वयं का अंशदान शामिल रहा। वर्तमान में यह यूनिट सालाना लगभग 40 लाख रुपये का कारोबार कर रही है और 9 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही है।

पारंपरिक स्वाद को मिला आधुनिक बाजार

स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट में मिलेट्स और स्थानीय अनाजों से तैयार उत्पादों की खास मांग है। मांडवे के बिस्कुट, गुड़-मक्खन बिस्कुट, हनी ओट्स बिस्कुट, मिल्क रस और पारंपरिक मिठाइयों ने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। “हाउस ऑफ हिमालय” जैसे प्लेटफॉर्म पर भी इन उत्पादों की पहुंच बन चुकी है। इसके अलावा, चकराता की राजमा, तुअर और मसूर दाल तथा कच्ची घानी का सरसों तेल भी उनके व्यवसाय का हिस्सा है।

राष्ट्रीय खेलों में भी दिखाई दमदार उपस्थिति

38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान यूनिट ने मिलेट्स आधारित उत्पादों से खिलाड़ियों का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान करीब 27 क्विंटल उत्पादों की बिक्री कर लगभग 10 लाख रुपये की आय अर्जित की गई। वहीं, हाल ही में आयोजित वसंत उत्सव में भी यूनिट को अच्छा लाभ मिला।

देहरादून से टिहरी-उत्तरकाशी तक विस्तार

शुरुआत में स्थानीय बाजारों तक सीमित यह यूनिट अब टिहरी और उत्तरकाशी तक अपने उत्पाद भेज रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन की मदद से शून्य प्रतिशत ब्याज पर इको वैन भी खरीदी गई है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में आपूर्ति आसान हो गई है।

पैकेजिंग में भी नवाचार

कल्पना बिष्ट ने अपने फैशन डिजाइनिंग कौशल का उपयोग करते हुए उत्पादों की आकर्षक और प्रीमियम पैकेजिंग तैयार की है, जो ग्राहकों को खासा पसंद आ रही है।

मुख्यमंत्री से मिला प्रोत्साहन

कल्पना बिष्ट ने बताया कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके समूह के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए 5 लाख रुपये की सहायता प्रदान की थी, जिससे मार्केटिंग और पैकेजिंग को मजबूती मिली।

अन्य महिलाओं के लिए बन रहा रोल मॉडल

जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता के अनुसार, स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट अब एक प्रोफेशनल और सफल मॉडल के रूप में उभर चुकी है। इसकी सफलता को देखते हुए अन्य विकासखंडों में भी इस तरह की यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर कल्पना बिष्ट की यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि प्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई दिशा भी दिखा रही है।

14 thoughts on “गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत, ‘स्वाभिमान’ ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की मिसाल…

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